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10th second attempt

10वीं Second Attempt की पूरी कहानी – अब 2 मौके क्यों मिल रहे हैं, किन बोर्डों में लागू है और दूसरी बार भी फेल हुए तो क्या होगा?

by Sadhana Soni

10वीं की बोर्ड परीक्षा अब पहले जैसी नहीं रही। पहले एक ही परीक्षा होती थी। अगर किसी बच्चे का पेपर खराब हो गया, किसी विषय में कम अंक आ गए या वह परीक्षा में सफल नहीं हो पाया, तो उसे दोबारा परीक्षा के लिए कई महीने या कभी-कभी पूरा एक साल इंतजार करना पड़ता था।

अब तस्वीर बदल रही है। नई शिक्षा नीति 2020 के बाद कई बोर्डों ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में दूसरा मौका देने की व्यवस्था शुरू की है। इसका मतलब है कि छात्र एक ही शैक्षणिक वर्ष में दूसरी परीक्षा देकर अंक सुधार सकता है या कुछ मामलों में असफल विषय को पास कर सकता है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। हर राज्य में दूसरा मौका बिल्कुल एक जैसा नहीं है। कहीं इसे दूसरी बोर्ड परीक्षा कहा गया है, कहीं द्वितीय अवसर परीक्षा, कहीं सुधार परीक्षा तो कहीं पूरक परीक्षा के रूप में लागू किया गया है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने 2026 से कक्षा 10 के लिए दो बोर्ड परीक्षाएं शुरू कर दी हैं। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे बोर्ड भी अलग-अलग रूप में दूसरी परीक्षा या दो-अवसर व्यवस्था लागू कर चुके हैं। राजस्थान ने भी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 10वीं में साल में दो बोर्ड परीक्षाओं की घोषणा की है।

तो आखिर 10वीं Second Attempt क्या है? यह कब शुरू हुआ? क्यों शुरू हुआ? किन बच्चों को फायदा मिलेगा? क्या दूसरी परीक्षा में कम अंक आए तो पहले वाले अंक बचेंगे? और अगर दूसरी बार भी बच्चा फेल हो गया तो क्या होगा?

आइए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।

10वीं Second Attempt क्या है?

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10वीं Second Attempt का सीधा मतलब है कि छात्र को एक ही शैक्षणिक वर्ष में दूसरी बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर मिल सकता है।

इसका उद्देश्य सिर्फ फेल हुए छात्रों को पास कराना नहीं है। कई बोर्डों में जो छात्र पहली परीक्षा में पास हो चुके हैं, वे भी दूसरी परीक्षा में बैठकर अपने अंक सुधार सकते हैं।

उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी छात्र को पहली परीक्षा में गणित में 55 अंक मिले। उसे लगता है कि वह बेहतर तैयारी करके 70 अंक ला सकता है। यदि उसके बोर्ड के नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो वह दूसरी परीक्षा दे सकता है।

अगर दूसरी परीक्षा में उसे 70 अंक मिलते हैं तो बेहतर अंक को अंतिम परिणाम में शामिल किया जा सकता है।

यही वजह है कि इसे केवल “फेल छात्रों की परीक्षा” समझना सही नहीं है।

यह व्यवस्था कब शुरू हुई?

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यानी NEP 2020 है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं के दबाव को कम करने और उन्हें कम “उच्च-दांव” वाली परीक्षा बनाने की बात कही गई है। नीति में कहा गया है कि छात्रों को एक शैक्षणिक वर्ष में बोर्ड परीक्षा देने के दो अवसर मिल सकें, जिसमें एक मुख्य परीक्षा और दूसरी सुधार के लिए हो सकती है।

इसके बाद अलग-अलग बोर्डों ने अपने हिसाब से नियम तैयार करना शुरू किया।

CBSE ने सबसे बड़ा कदम कब उठाया?

CBSE ने 25 जून 2025 को आधिकारिक रूप से घोषणा की कि 2026 से कक्षा 10 में दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

इस व्यवस्था के तहत 2026 में पहली बार CBSE ने कक्षा 10 के लिए मुख्य परीक्षा और दूसरी बोर्ड परीक्षा आयोजित की।

CBSE की पहली मुख्य परीक्षा 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 तक हुई, जबकि दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से 21 मई 2026 तक आयोजित की गई। दूसरी परीक्षा के बाद बेहतर प्रदर्शन को अंतिम परिणाम में शामिल किया गया।

इस तरह 2026 को CBSE की दो-बोर्ड-परीक्षा व्यवस्था का पहला साल माना जा सकता है।

10वीं की दूसरी परीक्षा क्यों शुरू की गई?

इसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। सबसे बड़ा उद्देश्य है कि एक परीक्षा की गलती से बच्चे का पूरा साल खराब न हो।

1. परीक्षा का तनाव कम करना

पहले बच्चों के मन में रहता था कि अगर फरवरी-मार्च की परीक्षा खराब हो गई तो पूरा साल खराब हो सकता है। दूसरा मौका इस डर को कम करता है।

2. खराब पेपर की भरपाई

कभी तैयारी अच्छी होने के बावजूद परीक्षा के दिन स्वास्थ्य, तनाव, घबराहट या किसी अन्य कारण से पेपर अच्छा नहीं जाता। दूसरी परीक्षा ऐसी स्थिति में सुधार का अवसर देती है।

3. अंक सुधारने का मौका

सिर्फ फेल छात्र ही नहीं, कुछ बोर्डों में पास छात्र भी अपने अंक बढ़ाने के लिए दूसरी परीक्षा दे सकते हैं।

4. एक साल बच सकता है

जो छात्र कुछ विषयों में सफल नहीं हो पाते, उनके लिए दूसरी परीक्षा उसी शैक्षणिक वर्ष में आगे बढ़ने का रास्ता खोल सकती है।

5. पढ़ाई को अधिक लचीला बनाना

नई शिक्षा नीति का उद्देश्य परीक्षा को सिर्फ याददाश्त और एक दिन के प्रदर्शन पर निर्भर रखने के बजाय अधिक लचीला बनाना है।

किन-किन राज्यों और बोर्डों में 10वीं की दूसरी परीक्षा की व्यवस्था है?

पूरे भारत में सभी राज्य बोर्डों ने एक समान दो-बोर्ड-परीक्षा नियम लागू नहीं किया है। अभी प्रमुख बोर्डों की स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है –

बोर्ड/राज्य दूसरी परीक्षा की स्थिति मुख्य बात
CBSE 2026 से लागू कक्षा 10 में मुख्य और दूसरी बोर्ड परीक्षा
मध्य प्रदेश बोर्ड लागू मुख्य परीक्षा के बाद द्वितीय परीक्षा; बेहतर अंकों के आधार पर परिणाम
कर्नाटक बोर्ड 2026 में लागू SSLC परीक्षा-1 और परीक्षा-2 के आधार पर बेहतर अंक वाला परिणाम
हरियाणा बोर्ड 2026 से दो अवसर 10वीं और 12वीं में दूसरी परीक्षा का अवसर
छत्तीसगढ़ बोर्ड लागू 10वीं और 12वीं के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था
गुजरात बोर्ड 2026 में सुधार अवसर दूसरी/पूरक परीक्षा में बेहतर अंक का लाभ
राजस्थान बोर्ड 2026-27 से 10वीं में साल में दो बोर्ड परीक्षाओं की घोषणा

मध्य प्रदेश बोर्ड के 2025-26 के नियमों में साफ कहा गया था कि पहली परीक्षा में अनुपस्थित या असफल छात्र दूसरी परीक्षा दे सकते हैं और पास छात्र भी अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। दोनों परीक्षाओं में से बेहतर अंक के आधार पर परिणाम तैयार किया जाता है। 2026-27 की बोर्ड गाइडलाइन में भी द्वितीय परीक्षा का प्रावधान मौजूद है।

कर्नाटक में 2026 के आधिकारिक परिणाम पोर्टल पर SSLC परीक्षा-1 और परीक्षा-2 के बेहतर अंकों का संयुक्त परिणाम जारी किया गया है।

हरियाणा बोर्ड ने 2026 में 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए दो अवसरों की व्यवस्था की। विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में दोबारा बैठकर अंक सुधारने का मौका दिया गया और दोनों प्रयासों में बेहतर अंक को अंतिम परिणाम के लिए माना गया।

छत्तीसगढ़ में भी 2025 से दूसरी बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था लागू होने की जानकारी सामने आई थी, जिसमें दूसरी परीक्षा जून-जुलाई में आयोजित की गई।

गुजरात बोर्ड ने 2026 में कक्षा 10 के छात्रों के लिए जून की पूरक परीक्षा के जरिए सुधार का अवसर दिया और बेहतर दो अंकों को मानने की व्यवस्था बताई।

वहीं राजस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 10 में दो बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। यहां पहली परीक्षा अनिवार्य होगी और पात्र छात्र दूसरी परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में अंक सुधार कर सकेंगे।

ध्यान दें – अलग-अलग बोर्डों में विषयों की संख्या, आवेदन, फीस, फेल छात्रों की पात्रता, परीक्षा का नाम और दूसरी परीक्षा के बाद मिलने वाले अवसर अलग हो सकते हैं। इसलिए छात्र अपने बोर्ड की नवीनतम अधिसूचना जरूर देखें।

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CBSE 10वीं Second Attempt में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

CBSE का नियम इस समय सबसे स्पष्ट है।

पहली परीक्षा देना जरूरी है

CBSE में छात्र के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। सिर्फ यह सोचकर कि “पहली परीक्षा नहीं देंगे और सीधे दूसरी परीक्षा दे देंगे” सही नहीं है।

यदि छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों में उपस्थित नहीं होता, तो उसे दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती और उसे अगले वर्ष की मुख्य परीक्षा में शामिल होना पड़ता है। CBSE ऐसे मामलों को Essential Repeat श्रेणी में रखता है।

दूसरी परीक्षा किसके लिए है?

CBSE के नियमों के अनुसार दूसरी परीक्षा में मुख्य रूप से ये विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं:

1. अंक सुधार करने वाले विद्यार्थी

2. पहली परीक्षा में कम्पार्टमेंट वाले विद्यार्थी

3. कम्पार्टमेंट और सुधार दोनों की जरूरत वाले विद्यार्थी

4. निर्धारित नियमों के अनुसार विषय बदलकर सुधार करने वाले विद्यार्थी

5. अंक सुधार के लिए अधिकतम तीन मुख्य विषयों में परीक्षा देने की अनुमति है।

पहली परीक्षा में फेल हुए तो क्या दूसरी परीक्षा दे सकते हैं?

हां, लेकिन फेल होने वाले विषयों और बोर्ड के नियमों पर निर्भर करेगा। CBSE में यदि विद्यार्थी पहली परीक्षा में निर्धारित संख्या तक विषयों में असफल होता है और उसका परिणाम कम्पार्टमेंट श्रेणी में आता है, तो वह दूसरी बोर्ड परीक्षा में कम्पार्टमेंट श्रेणी के तहत संबंधित विषय की परीक्षा दे सकता है।

यानी पहली परीक्षा में असफल होना हमेशा “पूरा साल खराब” होने का मतलब नहीं है। यही इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा है।

अगर पहली परीक्षा में 3 या उससे ज्यादा विषयों में फेल हो गए तो?

यहां बच्चों को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। CBSE में तीन या उससे अधिक विषयों में असफल या तीन या अधिक विषयों में परीक्षा से अनुपस्थित रहने पर दूसरी परीक्षा का रास्ता उपलब्ध नहीं होता।

ऐसे विद्यार्थी को अगले वर्ष की मुख्य बोर्ड परीक्षा में शामिल होना पड़ सकता है।

इसलिए यह सोचना बिल्कुल गलत है कि “अब तो साल में दो परीक्षा हैं, पहली परीक्षा में चाहे जितने विषय छोड़ देंगे, दूसरी में पास हो जाएंगे।” ऐसा नहीं है।

दूसरी परीक्षा में कम अंक आए तो क्या पहली परीक्षा के अंक खत्म हो जाएंगे?

CBSE  नियमों के अनुसार नहीं, यदि विद्यार्थी दोनों परीक्षाओं में किसी विषय की परीक्षा देता है, तो बेहतर प्रदर्शन को अंतिम परिणाम तैयार करने में माना जाता है।

उदाहरण

परीक्षा गणित में अंक
पहली बोर्ड परीक्षा 72
दूसरी बोर्ड परीक्षा 61
अंतिम परिणाम में मान्य 72

दूसरा उदाहरण

परीक्षा गणित में अंक
पहली बोर्ड परीक्षा 54
दूसरी बोर्ड परीक्षा 78
अंतिम परिणाम में मान्य 78

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CBSE ने 2026 के वास्तविक परिणाम में भी नियमित छात्रों के लिए दोनों प्रदर्शनों में से बेहतर प्रदर्शन को अंतिम परिणाम में शामिल किया।

मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे बोर्डों में भी बेहतर प्रदर्शन को महत्व देने की व्यवस्था लागू की गई है।

अगर दूसरी बार भी फेल हो गए तो क्या होगा?

इसका उत्तर बोर्ड के नियम पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्य रूप से दूसरी परीक्षा अंतिम और अनंत अवसर नहीं है।

अगर छात्र दूसरी परीक्षा में भी जरूरी विषयों को पास नहीं कर पाता, तो उसे संबंधित बोर्ड की अगली परीक्षा/कम्पार्टमेंट/पुनः परीक्षा व्यवस्था का लाभ लेना पड़ सकता है।

क्या दूसरी परीक्षा देने पर 11वीं में प्रवेश रुक जाएगा?

यह स्थिति बोर्ड और परिणाम की श्रेणी पर निर्भर कर सकती है।

कुछ बोर्ड विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा का परिणाम आने तक अगली कक्षा में अस्थायी/प्रोविजनल प्रवेश की अनुमति देते हैं।

मध्य प्रदेश की 2026-27 गाइडलाइन में कहा गया है कि दूसरी परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परिणाम घोषित होने तक अगली उच्चतर कक्षा में जोखिम पर अस्थायी प्रवेश दिया जा सकता है और यदि वे दूसरी परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित होते हैं तो उनकी उपस्थिति की गणना की जा सकती है।

इसलिए बच्चा दूसरी परीक्षा दे रहा है तो स्कूल से 11वीं के प्रवेश की स्थिति जरूर पूछे।

10वीं Second Attempt के सबसे बड़े लाभ

लाभ 1: पूरा साल बच सकता है

पहले किसी एक-दो विषय की वजह से विद्यार्थी को लंबा इंतजार करना पड़ सकता था। दूसरी परीक्षा उसी शैक्षणिक वर्ष में अवसर दे सकती है।

लाभ 2: खराब पेपर का नुकसान कम

अगर पहली परीक्षा में गणित खराब हो गया, तो छात्र दूसरी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

लाभ 3: अंक बढ़ाने का अवसर

पास छात्र भी कुछ बोर्डों में अंक सुधार सकता है।

लाभ 4: बेहतर अंक सुरक्षित

जहां Best of Two नियम लागू है, वहां दूसरी परीक्षा में कम अंक आने पर पहले के बेहतर अंक सुरक्षित रहते हैं।

लाभ 5: मानसिक दबाव कम

बच्चे के मन में यह डर कम होता है कि एक ही परीक्षा उसका पूरा भविष्य तय करेगी।

लाभ 6: आगे की पढ़ाई में मदद

बेहतर अंक मिलने से 11वीं में विषय चुनने और कुछ पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान मदद मिल सकती है। हालांकि किसी विशेष स्कूल या संस्था की प्रवेश शर्तें अलग हो सकती हैं।

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10वीं के बच्चों को अभी से क्या करना चाहिए?

अगर आप 10वीं में हैं तो इस बदलाव को केवल खबर की तरह न देखें। इसे अपनी पढ़ाई की रणनीति का हिस्सा बनाएं।

1. पहली परीक्षा को मुख्य लक्ष्य बनाएं

दूसरे मौके के भरोसे तैयारी न छोड़ें।

2. कमजोर विषय अभी पहचानें

अभी ही अपनी कॉपी लेकर देखें –

  • गणित में कौन से अध्याय कमजोर हैं?
  • विज्ञान में किन इकाइयों में दिक्कत है?
  • अंग्रेजी/हिंदी में कहां अंक कटते हैं?
  • सामाजिक विज्ञान में उत्तर लिखने में कितना समय लगता है?

3. केवल पास होने की तैयारी न करें

दूसरी परीक्षा अंक सुधारने का अवसर दे सकती है, लेकिन बेहतर होगा कि पहली परीक्षा में ही मजबूत अंक हासिल किए जाएं।

4. पहली परीक्षा के बाद तुरंत फैसला लें

परिणाम आने के बाद देखें कि वास्तव में किस विषय में सुधार की जरूरत है।

5. अपने बोर्ड का नियम जरूर देखें

CBSE का नियम देखकर MP, UP, राजस्थान या किसी दूसरे राज्य के नियम का अनुमान न लगाएं।

10वीं Second Attempt को लेकर 5 बड़ी गलतफहमियां

गलतफहमी 1: अब हर बोर्ड में दो बार परीक्षा होगी

गलत, अलग-अलग बोर्डों के नियम अलग हैं। कई बोर्ड अभी भी मुख्य परीक्षा और पूरक/कम्पार्टमेंट व्यवस्था के अलग मॉडल पर चलते हैं।

गलतफहमी 2: पहली परीक्षा में फेल हुए सभी छात्र दूसरी परीक्षा दे सकते हैं

जरूरी नहीं, विषयों की संख्या और बोर्ड की पात्रता शर्तें महत्वपूर्ण हैं।

गलतफहमी 3 : दूसरी परीक्षा में कम अंक आए तो वही अंतिम अंक होंगे

हर बोर्ड में ऐसा नहीं है, CBSE और कई अन्य बोर्डों में बेहतर अंक को महत्व दिया जाता है, लेकिन नियम बोर्ड के अनुसार देखना जरूरी है।

गलतफहमी 4: दूसरी परीक्षा मतलब पहली परीक्षा की तैयारी की जरूरत नहीं

बिल्कुल गलत, CBSE में पहली परीक्षा देना अनिवार्य है और बोर्ड ने खुद दूसरी परीक्षा को केवल बैकअप मानने से बचने की सलाह दी है।

गलतफहमी 5: दूसरी परीक्षा में भी फेल हुए तो सब खत्म

ऐसा भी नहीं है, बोर्ड की अगली कम्पार्टमेंट, पुनः परीक्षा या मुख्य परीक्षा के नियमों के अनुसार आगे मौका मिल सकता है। सही प्रक्रिया संबंधित बोर्ड तय करता है।

क्या यूपी बोर्ड में भी 10वीं के दो मौके हैं?

UP Board को CBSE के नियम से अलग समझना चाहिए। केवल इसलिए कि CBSE और कुछ राज्य बोर्डों ने दो परीक्षा व्यवस्था शुरू की है, यह मान लेना सही नहीं होगा कि UPMSP में भी बिल्कुल वही नियम लागू हो गया है।

यूपी बोर्ड की किसी भी नई दो-परीक्षा व्यवस्था के बारे में छात्रों को UPMSP की आधिकारिक अधिसूचना को ही अंतिम मानना चाहिए।

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10वीं Second Attempt पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

10वीं Second Attempt क्या है?

10वीं Second Attempt का मतलब है कि पात्र छात्रों को एक ही शैक्षणिक वर्ष में दूसरी बार बोर्ड परीक्षा देकर अंक सुधारने या निर्धारित विषय में सफलता प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।

10वीं में दो बोर्ड परीक्षा की शुरुआत क्यों हुई?

इसका मुख्य उद्देश्य बोर्ड परीक्षा के दबाव को कम करना, छात्रों को दूसरा अवसर देना और एक खराब परीक्षा के कारण पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की संभावना कम करना है। यह विचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रस्तावित किया गया था।

CBSE में 10वीं की दो बोर्ड परीक्षा कब से शुरू हुई?

CBSE ने 2026 से कक्षा 10 में दो बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था लागू की। इसकी आधिकारिक घोषणा 25 जून 2025 को की गई थी।

क्या CBSE में पहली बोर्ड परीक्षा देना जरूरी है?

हां, CBSE के अनुसार पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है।

CBSE में दूसरी परीक्षा में कितने विषयों में सुधार कर सकते हैं?

अंक सुधार के लिए अधिकतम तीन मुख्य विषयों में परीक्षा देने की अनुमति है, निर्धारित नियमों के अनुसार।

पहली परीक्षा में फेल होने पर क्या दूसरी परीक्षा दे सकते हैं?

यदि विद्यार्थी संबंधित बोर्ड की पात्रता शर्तें पूरी करता है तो दूसरी परीक्षा में असफल विषय को पास करने का अवसर मिल सकता है। CBSE में कम्पार्टमेंट श्रेणी के छात्रों के लिए दूसरी परीक्षा का प्रावधान है।

अगर CBSE में तीन या ज्यादा विषयों में फेल हो जाएं तो क्या होगा?

ऐसे विद्यार्थी दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए पात्र नहीं होते और उन्हें अगले वर्ष की मुख्य परीक्षा में शामिल होना पड़ सकता है।

दूसरी परीक्षा में कम अंक आए तो क्या पहले के अंक रहेंगे?

CBSE में दोनों परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन को अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए माना जाता है।

क्या दूसरी परीक्षा केवल फेल छात्रों के लिए है?

नहीं। कई बोर्डों में पास छात्र भी अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा दे सकते हैं।

क्या दूसरी परीक्षा देने से पूरा साल बच सकता है?

कुछ मामलों में हां, यदि छात्र दूसरी परीक्षा में आवश्यक विषय पास कर लेता है तो उसे अगले शैक्षणिक वर्ष तक इंतजार नहीं करना पड़ सकता। लेकिन आगे की कक्षा में प्रवेश के नियम संबंधित बोर्ड और स्कूल पर निर्भर करते हैं।

अगर दूसरी परीक्षा में भी फेल हो जाएं तो क्या होगा?

दूसरी परीक्षा अंतिम असीमित अवसर नहीं है। ऐसे छात्र को अपने बोर्ड के नियमों के अनुसार अगली मुख्य, कम्पार्टमेंट या पुनः परीक्षा में शामिल होना पड़ सकता है।

क्या सभी राज्य बोर्डों में दो बार 10वीं की परीक्षा होती है?

नहीं, यह व्यवस्था अभी पूरे देश में एक समान लागू नहीं है। अलग-अलग बोर्डों ने अलग मॉडल अपनाए हैं।

क्या राजस्थान में 10वीं की परीक्षा दो बार होगी?

राजस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करने की घोषणा की है। 10वीं में दूसरी परीक्षा में अधिकतम तीन विषयों में अंक सुधार का अवसर देने की बात कही गई है।

क्या मध्य प्रदेश में 10वीं की दूसरी परीक्षा होती है?

हां, MPBSE ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के लिए द्वितीय परीक्षा की व्यवस्था लागू की है। मुख्य परीक्षा में असफल/अनुपस्थित छात्रों के साथ पास छात्र भी निर्धारित नियमों के अनुसार अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा दे सकते हैं।

क्या दूसरी परीक्षा का मतलब है कि छात्र पहली परीक्षा की तैयारी छोड़ सकते हैं?

बिल्कुल नहीं, दूसरी परीक्षा को सुधार का अवसर मानना चाहिए, पहली परीक्षा का विकल्प नहीं।

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